पुलवामा के बाद राजौरी सेक्टर में IED ब्लास्ट, मेजर शहीद


पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले पुलवामा आंतकी हमले में 42 जवानों के शहीद होने के दो दिन बाद फिर एलओसी के राजौरी में आईईडी ब्लास्ट हुआ. जिसमें सेना के मेजर चित्रेश बिस्ट (55) शहीद हो गए. वह इंजीनियरिंग ऑफिसर के पद पर तैनात थे.

एलओसी के पास शनिवार शाम को पेट्रोलिंग पार्टी को निशाना बनाकर यह ब्लास्ट किया गया. हालांकि, अभी तक किसी भी आंतकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.

यह विस्फोट राजौरी सेक्टर स्थित नौशेरा के लाम झंगर इलाके में हुआ. इस ​विस्फोट में इंजीनियरिंग यूनिट के एक मेजर गंभीर रूप से घायल हो गए थे. अब उन्होंने दम तोड़ दिया है. हालांकि अभी तक शहीद हुए अधिकारी की पहचान नहीं हो पाई है.

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षा बलों के काफिले पर अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले के बाद शुक्रवार को पाकिस्तान की ओर से फिर पुंछ में एलओसी के पास सीजफायर का उल्लंघन किया गया. हालांकि भारत ने भी इसका मुंहतोड़ जवाब दिया. जम्मू कश्मीर में लगातार आंतकी हमले के बाद इंटरनेट सेवा को रोक दिया गया है.

बता दें कि जम्मू कश्मीर में 14 फरवरी को बहुत बड़ा आतंकी हमला हुआ था. पुलवामा के गोरीपोरा इलाके में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकियों ने IED से हमला किया. जिसमें 42 जवान शहीद हो गए. आतंकी संगठन जैश-ए- मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली. उरी के बाद इसे पहला इतना बड़ा हमला माना जा रहा है. IED से हुआ यह पहला हमला नहीं है. 2016 में पठानकोट इलाके पर हुए हमले में भी बहुत से लोग IED से घायल हुए थे. क्या है ये IED और यह कितना खतरनाक है?

क्या होता है IED:

IED यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस. यह एक तरह के बम होते हैं जो मिलिट्री के बमों से अलग तरीके से बनाए जाते हैं. इन्हें सड़क के किनारे लगाए जाने वाले बमों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इन बमों को बहुत कामचलाऊ तरीके से बनाया जाता है. इसीलिए इनमें घातक, विषैले, पटाखे बनाने वाले और आग लगाने वाले केमिकल शामिल होते हैं. इन्हें इस तरह से बनाया जाता है कि इसपर पांव पड़ने या गाड़ी का पहिया पड़ने से ही ये फट जाते हैं. इनका इस्तेमाल विरोधियों को रोकने और तितर-बितर करने के लिए किया जाता है.

 

 


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